पितृ दोष होने पर परिवार की तरक्की रुक जाती है और वंश आगे नहीं बढ़ता। त्रिपिंडी श्राद्ध एक विशेष 'काम्य श्राद्ध' है, जो तीन पीढ़ियों के पितरों (देव, ऋषि और पितृ) की तृप्ति के लिए किया जाता है। यदि पितृ पक्ष में श्राद्ध नहीं कर पाए या पितृ अतृप्त हैं, तो यह अनुष्ठान किसी भी शुभ समय पर विद्वान पंडितों द्वारा किया जाता है।