Pret Badha Nivaran Puja

Purpose: Seek divine protection and remove negative energies, ancestral disturbances, unseen obstacles, and spiritual imbalance caused by restless energies or Pret Badha Dosha.

Mode: Online Pret Badha Nivaran Puja with Personalized Sankalp, Vedic Mantra Jaap, Havan, and Prasad Delivery.

Inclusions: Complete Vedic Rituals, Personalized Sankalp, Powerful Mantra Chanting, Havan & Spiritual Protection Rituals, Energized Prasad Potli, Puja Photos & Video Recording

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प्रेत बाधा निवारण पूजा क्या है?

प्रेत बाधा निवारण पूजा कोई अंधविश्वास या झाड़-फूंक नहीं है, बल्कि यह वैदिक और तांत्रिक पद्धतियों द्वारा नकारात्मक ऊर्जा को शांत करने और भगाने की एक पवित्र धार्मिक प्रक्रिया है। इस पूजा के केंद्र में उग्र और रक्षक देवताओं का आह्वान किया जाता है, जैसे—भगवान सुदर्शन (विष्णु जी का चक्र), महाबली हनुमान जी, भगवान काल भैरव, या Maa Baglamukhi (माँ बगलामुखी)

इस अनुष्ठान में मुख्य रूप से 'नारायण बलि', 'त्रिपिंडी श्राद्ध', 'सुदर्शन होम' या 'बजरंग बाण' के विशेष संपुट पाठ किए जाते हैं। इसमें पवित्र नदियों के जल, काले तिल, कुशा, राई, लोबान और विशेष जड़ी-बूटियों की आहुति देकर उस नकारात्मक शक्ति के बंधन को काटा जाता है।

प्रेत बाधा निवारण पूजा के लाभ क्या हैं?

नकारात्मकता का समूल नाश
पूजा के प्रभाव से पीड़ित व्यक्ति के शरीर या घर में छिपी हुई कैसी भी बुरी आत्मा या प्रेत बाधा तुरंत वह स्थान छोड़कर भाग जाती है।
भय से परमानेंट मुक्ति
व्यक्ति के मन से हर तरह का अनजान डर, डिप्रेशन और रात में आने वाले डरावने सपने पूरी तरह बंद हो जाते हैं।
भटकती आत्मा को मुक्ति
इस पूजा (जैसे नारायण बलि) का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह केवल पीड़ित को ही नहीं बचाती, बल्कि उस भटक रही प्रेत आत्मा को भी मोक्ष या सद्गति दिलाती है, जिससे वह हमेशा के लिए शांत हो जाती है।
अभेद्य सुरक्षा कवच
अनुष्ठान के बाद घर और व्यक्ति के चारों तरफ एक ऐसा दैवीय सुरक्षा चक्र बन जाता है, जिसे भविष्य में कोई भी मैली विद्या या ऊपरी हवा भेद नहीं पाती।
घर में बरकत और शांति
पित्रों और देवताओं के प्रसन्न होने से घर में खुशहाली, रुका हुआ पैसा और सुख-शांति दोबारा लौट आती है।

यह पूजा कब और कहाँ करवानी चाहिए?

विशेष सिद्ध स्थान
यह पूजा कभी भी सामान्य जगह पर नहीं करनी चाहिए। इसके लिए त्रयम्बकेश्वर (नासिक), गया (बिहार), हरिद्वार, बद्रीनाथ या मेहंदीपुर बालाजी जैसे सिद्ध और तीर्थ स्थानों को ही सबसे उत्तम माना गया है।
पितृपक्ष और अमावस्या
  • पित्रों के दिन यानी पितृपक्ष (श्राद्ध के १५ दिन) या किसी भी महीने की अमावस्या तिथि इस पूजा के लिए सबसे ज्यादा फलदायी होती है।

  • नवरात्रि और गुप्त नवरात्रि
    • माता दुर्गा के इन पवित्र दिनों में भी इस तरह की बाधाओं को काटने के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।

    Pret Badha Nivaran Puja Packages

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    Frequently Asked Questions

    शास्त्रों के अनुसार, प्रेत बाधा निवारण या नारायण बलि जैसी बड़ी पूजाओं को भूलकर भी अपने घर पर नहीं करवाना चाहिए। क्योंकि इन पूजाओं में नकारात्मक शक्तियों को खींचकर उन्हें शांत या विसर्जित किया जाता है। घर पर करने से अन्य सदस्यों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। इसे हमेशा किसी तीर्थ क्षेत्र या नदी के तट पर ही कराना चाहिए।
    घर को सुरक्षित रखने के लिए रोज़ शाम को घर में गूगल, लोबान या कपूर का धुआं करें। घर में नियमित रूप से शंख बजाएं या गायत्री मंत्र का पाठ करें। हनुमान जी के चरणों का सिंदूर घर के मुख्य द्वार पर लगाएं। जहां स्वच्छता, भगवान का नाम और बड़ों का सम्मान होता है, वहां कभी कोई प्रेत बाधा टिक नहीं सकती।

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